लॉकडाउन के दौरान जैविक खेती के लिए जनता को प्रोत्साहित कर रहा जिला प्रशासन सिरमौर

देवभूमि हिमाचल में खेती की लागत को कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने 2020-21 तक 20,000 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के तहत लाने का फैसला किया है। राज्य में हजारों किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया और इसका लाभ उठाया है। सिरमौर के किसानों ने भी प्राकृतिक और जैविक खेती में गहरी रुचि दिखाई है। कोरोना वायरस की रोकथाम हेतु लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन और कर्फ्यू के मद्देनजर जिला प्रशासन सिरमौर ने अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत लोगों को अपने घरों के पास जैविक खेती अपनाकर सब्जियों को उगाने के लिए अपने समय का सदुपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल को लोगों ने सराहा है।

किसानों को उपलब्ध करवाए जा रहे वर्मीकम्पोस्ट, काऊडंग लॉग व बीजों की किट

कृषि और पशुपालन विभाग ने नाहन के ऐतिहासिक चैगान मैदान में एक विशेष स्टॉल लगाया है, जहां अरावली संगठन के स्वयं सेवकों द्वारा वर्मीकम्पोस्ट और काऊडंग लॉग के साथ लोगों को विभिन्न सब्जियों के बीजों की किट भी प्रदान किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की इस पहल के तहत 1200 से अधिक बीज किट अब तक लोगों को उपलब्ध कराए गए हैं। इस सीड किट में छह प्रकार की सब्जियां जैसे कि भिंडी, करेला, लौकी, मक्का, फ्रेंच बीन और स्पंज लौकी शामिल हैं। सब्जियों के बीजों की एक किट जिसकी कीमत 25 रुपए है, उसे स्टाल पर 10 रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लोगों को खाली प्लास्टिक की बोतलों, गमलों, बाल्टियों और खाली बैगों का उपयोग करके घरों से निकलने वाले कचरे से वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि और खेती के तरीकों के बारे में भी बताया जा रहा है।

किसान हेल्पलाइन के माध्यम से किया 2000 समस्या का समाधान

लॉकडाउन के दौरान किसानों को किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने एक किसान हेल्पलाइन शुरू की है, जिसमें जिले के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के फोन नम्बर दिए गए हैं, ताकि किसान उनसे सीधे संवाद कर सकें और उनकी समस्याओं का समाधान हो सके। इस हेल्पलाइन के तहत किसानों की विभिन्न समस्याओं के बारे में अब तक 2000 से अधिक कॉल प्राप्त हुई हैं, जिन्हें विभाग के अधिकारियों द्वारा हल किया गया है। कृषि उत्पादन में किसानों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि फसलों के लिए प्रतिकूल मौसम, विनाशकारी कीट के हमले, पौधों की बीमारी के संक्रमण, प्रतिरक्षा में गिरावट, उपजाऊ शक्ति का क्षय, पानी की कमी और बाजार के बदलते परिवेश के बारे में जानकारी देने के लिए इसे शुरू किया है। इससे किसानों की फसल की कृषि उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें कृषि से संबंधित सही जानकारी और सलाह दी जा रही है।